लोनी में प्रदूषण का कहर: 15 लाख की आबादी के लिए ‘सांसों का आपातकाल’

गाजियाबाद के लोनी इलाके में प्रदूषण का स्तर लगातार दूसरे दिन ‘खतरनाक’ (Hazardous) श्रेणी में बना हुआ है। लोनी, जो घनी आबादी और छोटे उद्योगों का केंद्र है, आज 450 से 800 के बीच AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) दर्ज कर रहा है। लोनी देहात के कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर सुबह के समय AQI 890 तक पहुँच गया, जो कि स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद जानलेवा स्तर है। लोनी की लगभग 15 लाख की आबादी वर्तमान में जहरीले स्मॉग की चादर में लिपटी हुई है, जहाँ दृश्यता शून्य के करीब है और लोगों को खुली हवा में सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
लोनी की इस स्थिति के पीछे स्थानीय भौगोलिक कारण और ‘तापमान का उलटना’ (Temperature Inversion) मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। कम ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में हवा की गति लगभग स्थिर है, जिससे वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन वायुमंडल की निचली सतह पर ही जमा हो गए हैं। लोनी के निवासियों ने आंखों में लगातार जलन, गले में खराश और सांस फूलने की शिकायत की है। विशेष रूप से बच्चे और बुजुर्ग इस प्रदूषण की मार झेल रहे हैं, जिससे स्थानीय क्लीनिकों और अस्पतालों में ‘रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस’ के मरीजों की कतारें लग गई हैं।
बढ़ते संकट को देखते हुए, लोनी में ग्रैप-4 (GRAP-4) की पाबंदियों को और सख्त कर दिया गया है। प्रशासन ने लोनी नगरपालिका क्षेत्र में कचरा जलाने और अवैध निर्माण कार्यों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। सड़कों पर एंटी-स्मॉग गन और पानी के टैंकरों के जरिए धूल को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन हवा की गुणवत्ता में कोई बड़ा सुधार नहीं दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने एक नई एडवायजरी जारी कर लोनी के लोगों को N95 मास्क पहनने और सुबह की सैर पूरी तरह बंद करने का निर्देश दिया है। क्षेत्र में प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति ने 2025 के अंत में पर्यावरण सुरक्षा और शहरी नियोजन पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।



