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दिल्ली-एनसीआर में ठंड का ‘रेड अलर्ट’: 3°C के साथ तीन साल का रिकॉर्ड टूटा, जमने लगी राजधानी

दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर (Cold Wave) के कारण मौसम विभाग (IMD) ने ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया है। बुधवार की सुबह दिल्ली का न्यूनतम तापमान गिरकर 3.0°C दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में जनवरी के महीने का सबसे कम तापमान है। सफदरजंग और लोधी रोड जैसे इलाकों में तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री नीचे चला गया है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने मैदानी इलाकों में ठिठुरन इतनी बढ़ा दी है कि लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। सुबह के समय घने कोहरे की वजह से पालम और आईजीआई एयरपोर्ट पर दृश्यता (Visibility) शून्य रही, जिससे यातायात पूरी तरह ठप पड़ गया है।

इस भीषण ठंड का सबसे बुरा असर परिवहन और दैनिक मजदूरी करने वालों पर पड़ा है। कोहरे के कारण दिल्ली आने वाली 25 से अधिक ट्रेनें 6 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं, जबकि खराब दृश्यता के चलते 50 से अधिक उड़ानों के समय में बदलाव करना पड़ा है। गाजियाबाद और नोएडा के जिलाधिकारियों ने ठंड को देखते हुए रैन बसेरों की संख्या बढ़ाने और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तापमान में लंबे समय तक रहने से ‘फ्रॉस्टबाइट’ और हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। रेड अलर्ट के मद्देनजर, प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे केवल आपातकालीन स्थिति में ही घर से बाहर निकलें।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 72 घंटों तक राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। ‘विंटर इनवर्जन’ के कारण प्रदूषक कण जमीन की सतह के करीब फंस गए हैं, जिससे AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) भी ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है। कड़ाके की ठंड और प्रदूषण के इस घातक मेल ने बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना मुश्किल कर दिया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई हिस्सों में पाला (Frost) गिरने की भी खबरें हैं, जिससे रबी की फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका है। सरकार ने स्थानीय नगर निगमों को निर्देशित किया है कि वे सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न हो, और स्वयंसेवी संस्थाओं से गर्म कपड़े और कंबल बांटने की अपील की है।

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