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प्रदूषण पर दिल्ली सरकार का प्रहार: उल्लंघन करने वाली इकाइयों की सीधे सीलिंग

दिल्ली में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने प्रदूषण नियमों की अनदेखी करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान शुरू किया है। इस नए आदेश के तहत, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और जिला प्रशासन की टीमों को यह अधिकार दिया गया है कि वे प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बिना किसी पूर्व नोटिस के सीधे सील कर दें। आमतौर पर सीलिंग से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता था, लेकिन मौजूदा ‘पर्यावरण आपातकाल’ को देखते हुए इस प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया है ताकि तत्काल प्रभाव से जहरीले उत्सर्जन को रोका जा सके।

इस अभियान का मुख्य केंद्र उत्तर-पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली के औद्योगिक क्लस्टर हैं, जहाँ कोयले या रबर जैसे अवैध ईंधन का उपयोग करने की शिकायतें मिल रही थीं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन इकाइयों के पास प्रभावी ‘एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’ (ETP) नहीं हैं या जो इकाइयां प्रतिबंधित ईंधन जलाती पकड़ी जाएंगी, उन्हें मौके पर ही बंद कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, डीजल जनरेटर सेटों (DG Sets) के अवैध उपयोग पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि नियमों का उल्लंघन न केवल कानून का अपमान है, बल्कि यह दिल्ली के लाखों नागरिकों की सेहत के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीलिंग की इस कार्रवाई के साथ-साथ सरकार ने भारी जुर्माना भी लगाने का प्रावधान किया है। ‘प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करे’ (Polluter Pays Principle) के सिद्धांत के तहत, दोषी इकाइयों पर लाखों रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा थोपा जा रहा है। सरकार ने स्थानीय पुलिस को भी निर्देश दिया है कि वे सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखें और विरोध करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करें। इस सख्त कदम का उद्देश्य उद्योगों को पर्यावरण अनुकूल गैस-आधारित ईंधन की ओर स्थानांतरित होने के लिए मजबूर करना है। आने वाले सप्ताह में यह अभियान और तेज होने की उम्मीद है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में हड़कंप मचा हुआ है।

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