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संसद बजट सत्र: पहले चरण का समापन और विधायी लेखा-जोखा

संसद के बजट सत्र के पहले चरण का आज आखिरी दिन है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों का संगम देखने को मिला। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई थी, जिसके बाद केंद्रीय बजट पेश किया गया। आज सदन की कार्यवाही के दौरान बजट पर चर्चा को अंतिम रूप दिया जा रहा है और विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर विचार किया जा रहा है। सरकार के लिए यह चरण काफी सफल रहा क्योंकि उसने कई प्रमुख आर्थिक सुधारों और योजनाओं को सदन के पटल पर रखा, जबकि विपक्ष ने महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर घेराबंदी जारी रखी।

इस सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा दोनों में कामकाज की उत्पादकता पिछले सत्रों की तुलना में काफी बेहतर रही है। धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के विजन को स्पष्ट किया और विकसित भारत के रोडमैप को रेखांकित किया। वहीं, विपक्षी दलों ने जातिगत जनगणना और किसानों के एमएसपी (MSP) मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव दिए, जिससे सदन में कई बार गतिरोध की स्थिति भी बनी। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि पहले चरण में सदन ने न केवल विधायी कार्यों को निपटाया, बल्कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर घंटों तक स्वस्थ बहस भी की।

आज की कार्यवाही समाप्त होने के बाद संसद एक छोटे अवकाश पर जाएगी, जिसके दौरान विभागीय स्थायी समितियां (Standing Committees) बजट प्रस्तावों और मंत्रालयों के खर्चों की विस्तृत जांच करेंगी। सत्र का दूसरा चरण मार्च के मध्य में शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें वित्त विधेयक को पारित किया जाएगा। आज अंतिम दिन होने के कारण शून्यकाल और विशेष उल्लेख के माध्यम से सांसदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। अब सभी की निगाहें समितियों की रिपोर्ट और दूसरे चरण में होने वाले संभावित विधायी बदलावों पर टिकी हैं।

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