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अमरावती को कानूनी राजधानी बनाने की तैयारी, केंद्र करेगा एक्ट में संशोधन

आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर चल रहे लंबे विवाद को अब केंद्र सरकार समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। खबर है कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सुप्रीमो और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की मांग पर केंद्र सरकार अमरावती को राज्य की आधिकारिक और एकमात्र राजधानी बनाने के लिए कानूनी वैधता देने की तैयारी कर रही है।

  • नायडू की मांग: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू लगातार केंद्र सरकार से मांग कर रहे थे कि अमरावती को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम (AP Reorganisation Act) में संशोधन करके कानूनी राजधानी घोषित किया जाए।
  • संशोधन की योजना: सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 5 (2) में संशोधन करने जा रही है, जिससे अमरावती को आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के रूप में जोड़ा जाएगा।
  • कानूनी वैधता का उद्देश्य: नायडू का तर्क है कि अमरावती को कानूनी राजधानी घोषित करने से भविष्य में कोई भी मुख्यमंत्री (खासकर जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के ‘तीन राजधानियों’ के विचार को देखते हुए) राजधानी को बदलने का प्रयास नहीं कर पाएगा, जिससे स्थिरता आएगी।
  • पृष्ठभूमि: तेलंगाना के गठन के बाद, अमरावती को राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया था। हालांकि, पिछली वाईएसआरसीपी सरकार ने अमरावती (विधायी), विशाखापत्तनम (कार्यकारी) और कुरनूल (न्यायिक) को तीन राजधानियाँ बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिससे अमरावती का विकास ठंडे बस्ते में चला गया था।
  • वर्तमान स्थिति: यह संशोधन प्रस्ताव कथित तौर पर कानून मंत्रालय की मंजूरी प्राप्त कर चुका है और अब इसे केंद्रीय कैबिनेट की मुहर और फिर संसद में अनुमोदन की आवश्यकता होगी।
  • NDA का समर्थन: चूंकि TDP केंद्र में NDA गठबंधन का एक प्रमुख सहयोगी है, इसलिए माना जा रहा है कि यह बिल संसद के आगामी सत्र में पेश किया जा सकता है और इसे आसानी से पारित किया जा सकता है।

यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो अमरावती राजधानी परियोजना को स्थायी कानूनी आधार मिल जाएगा, जिससे आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ आएगा।

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