गाजियाबाद में ‘हवा’ का संकट: जहरीली धुंध में कैद शहर, वसुंधरा सबसे प्रदूषित

गाजियाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। आज मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 की सुबह शहर के लगभग सभी निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में दर्ज किया गया। स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, वसुंधरा इलाका 400 से 450 के बीच AQI के साथ सबसे प्रदूषित क्षेत्र बना हुआ है। शहर के अन्य हिस्सों जैसे लोनी, संजय नगर और इंदिरापुरम में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रशासन द्वारा ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (GRAP) के चौथे चरण की पाबंदियां लागू होने के बावजूद, प्रदूषण के स्तर में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर के पीछे गिरता तापमान और हवा की गति का कम होना मुख्य कारण बताया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, ‘टेंपरेचर इन्वर्जन’ (तापमान का उलटना) की स्थिति के कारण प्रदूषित कण (PM 2.5 और PM 10) वायुमंडल की निचली सतह पर ही थम गए हैं। वसुंधरा और साहिबाबाद जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में धूल और धुएं के मिश्रण ने एक घना ‘स्मॉग’ बना दिया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस जहरीली हवा में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए उतना ही हानिकारक है जितना दिन में 15 से 20 सिगरेट पीना। अस्पतालों में सांस के मरीजों और आंखों में जलन की शिकायत करने वाले लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।
बिगड़ते हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी है और सड़कों पर पानी का छिड़काव तेज कर दिया है। गंभीर प्रदूषण और घने कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) भी 50 मीटर से कम रह गई है, जिससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और एलिवेटेड रोड पर यातायात प्रभावित हुआ है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुबह और शाम के समय घर से बाहर निकलने से बचें और यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो एन-95 मास्क का प्रयोग जरूर करें। साथ ही, बच्चों और बुजुर्गों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि वर्तमान हवा उनके लिए ‘जानलेवा’ साबित हो सकती है।



