
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी पर राज्य की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का एक नया और गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है। शिमला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम सुक्खू ने दावा किया कि भाजपा एक बार फिर ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए उनके विधायकों को करोड़ों रुपये और बड़े पदों का प्रलोभन देकर तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर पिछले दरवाजे से सत्ता हथियाने का षड्यंत्र रच रहे हैं, क्योंकि वे जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के पास पूर्ण बहुमत है और कांग्रेस का हर विधायक एकजुट होकर जनहित के कार्यों में लगा हुआ है। इस बयान के बाद हिमाचल की शांत वादियों में सियासी पारा अचानक चढ़ गया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भाजपा की यह कोशिश केवल कांग्रेस को कमजोर करने की नहीं, बल्कि देवभूमि की जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात करने की एक सोची-समझी साजिश है। सुक्खू ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग करते हुए विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने के लिए जांच एजेंसियों का भय दिखाया जा रहा है और राज्य के विकास बजट में भी अड़ंगे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि भाजपा के कुछ बड़े नेता कांग्रेस के बागी और वर्तमान विधायकों के संपर्क में हैं और उन्हें दिल्ली बुलाकर प्रलोभन दिए जा रहे हैं। सीएम ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता इस तरह की ‘खरीद-फरोख्त’ की राजनीति को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी और वक्त आने पर करारा जवाब देगी। कांग्रेस हाईकमान ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए भाजपा को अपनी ‘गंदी राजनीति’ बंद करने की नसीहत दी है।
दूसरी ओर, हिमाचल भाजपा ने मुख्यमंत्री के इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और अपनी नाकामियों को छिपाने का एक ‘हताशा भरा प्रयास’ करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू को अपनी सरकार और विधायकों पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे इस तरह की मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रहे हैं। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक कलह और जनता के बीच घटती लोकप्रियता के कारण सरकार खुद गिर रही है, जिसके लिए भाजपा को दोष देना हास्यास्पद है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने चुनौती दी कि यदि मुख्यमंत्री के पास कोई सबूत है तो उन्हें सार्वजनिक करें, अन्यथा अनर्गल आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना बंद करें। इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बड़े उलटफेर की संभावनाएं बनी हुई हैं।



