बांग्लादेश संकट: प्रियंका गांधी की केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील

बांग्लादेश में गहराते राजनीतिक और सामाजिक संकट के बीच, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारत सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने और तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने पड़ोसी देश में जारी अस्थिरता, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा और वहां के बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रियंका गांधी ने कहा कि बांग्लादेश के हालात न केवल मानवीय दृष्टिकोण से चिंताजनक हैं, बल्कि इनका सीधा असर भारत की आंतरिक सुरक्षा और सीमावर्ती राज्यों की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह एक जिम्मेदार पड़ोसी होने के नाते अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाए और वहां फंसे भारतीय नागरिकों व प्रताड़ित समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कूटनीतिक कदम उठाए।
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही धार्मिक स्थलों पर हमले और हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिसे लेकर भारत में व्यापक आक्रोश है। प्रियंका गांधी ने रेखांकित किया कि दक्षिण एशिया में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए भारत की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह बांग्लादेश के वर्तमान नेतृत्व के साथ निरंतर संवाद बनाए रखे ताकि चरमपंथी तत्वों पर लगाम कसी जा सके। विपक्षी नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो सीमा पार से शरणार्थियों का संकट गहरा सकता है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के जनसांख्यिकीय और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
इस संकट के समाधान के लिए प्रियंका गांधी ने एक सर्वदलीय दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया है, ताकि पूरा देश इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुट होकर एक स्वर में बात कर सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा करना भारत की विदेश नीति का मूल आधार रहा है, और बांग्लादेश के संदर्भ में भी हमें इन मूल्यों के साथ खड़ा होना चाहिए। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय को संबोधित करते हुए उन्होंने अपील की कि वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए वैश्विक समुदाय का सहयोग भी मांगा जाना चाहिए। यह अपील ऐसे समय में आई है जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पहले ही भारत-बांग्लादेश सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर रखा है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।



