
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के सरकारी डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए उनके पोस्टमार्टम भत्ते (Post-mortem Allowance) में ढाई गुना की वृद्धि की है। अब डॉक्टरों को प्रति शव का पोस्टमार्टम करने पर 100 रुपये के स्थान पर 250 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। यह निर्णय पूरे 20 साल के लंबे अंतराल के बाद लिया गया है, जो इस संवेदनशील और कठिन कार्य में लगे चिकित्सकों की पुरानी मांग को पूरा करता है। स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश से प्रदेश के हजारों चिकित्सा अधिकारियों को सीधा लाभ मिलेगा, जो कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भत्ते की दरों का इतिहास देखें तो उत्तर प्रदेश में वर्ष 1992 के दौरान पोस्टमार्टम के लिए केवल 50 रुपये निर्धारित थे, जिसे बाद में साल 2005 में बढ़ाकर 100 रुपये किया गया था। तब से लेकर अब तक, यानी पिछले दो दशकों से यह राशि स्थिर थी, जबकि इस दौरान डॉक्टरों की जिम्मेदारियां और कार्यभार कई गुना बढ़ गया था। अपर निदेशक (राज्य चिकित्सा विधि विशेषज्ञ) द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को पत्र जारी कर दिया गया है। डॉक्टरों का मानना है कि यह वृद्धि प्रतीकात्मक ही सही, लेकिन उनके कठिन परिश्रम और विषम परिस्थितियों में किए जाने वाले कार्य के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
पारिश्रमिक में वृद्धि के साथ-साथ सरकार ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया में सुधार के लिए अन्य कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। हाल ही में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आदेश दिया है कि शव का पोस्टमार्टम अधिकतम 4 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से संपन्न किया जाए, ताकि शोक संतप्त परिजनों को शव के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। साथ ही, अब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ऑनलाइन जारी की जाएगी और वीडियोग्राफी का खर्च भी पीड़ित परिवारों से नहीं लिया जाएगा। इन सुधारों और भत्ते में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य पोस्टमार्टम हाउसों की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, मानवीय और डॉक्टरों के लिए उत्साहवर्धक बनाना है, जिससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आ सके।



