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कफ सिरप त्रासदी: भारत के ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम में सुधार की मांग

विभिन्न देशों में भारतीय निर्मित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की दुखद मौतों की कई घटनाओं के बाद, भारत के ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम (औषधि नियामक प्रणाली) में बड़े और तत्काल सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कई बार जारी की गई चेतावनी और अंतर्राष्ट्रीय जांचों से यह स्पष्ट हो गया है कि इन सिरपों में डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) और एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene Glycol) जैसे जहरीले तत्व पाए गए थे। इस त्रासदी ने भारत की दवा गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो दुनिया भर में सस्ती जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।

इस गंभीर संकट के बाद, विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और यहाँ तक कि भारतीय सांसदों ने भी देश की नियामक संस्थाओं, विशेष रूप से केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की कार्यप्रणाली की आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं के निर्माण की प्रक्रिया की निगरानी, कच्चे माल के परीक्षण और दवा निर्माण इकाइयों के नियमित औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) में भारी खामियाँ हैं। मांग की जा रही है कि दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को और अधिक कठोर तथा पारदर्शी बनाया जाए।

दवा सुरक्षा में सुधार के लिए, अब सरकार पर ‘जीएमपी’ (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज) मानकों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक उठाने का दबाव है। इसके अतिरिक्त, राज्य और केंद्र स्तर पर नियामक निकायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि नकली और घटिया दवाओं के निर्माण को रोका जा सके। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि भारतीय दवा उद्योग अपनी वैश्विक विश्वसनीयता को फिर से स्थापित करे। इस त्रासदी से सबक लेकर, सरकार को एक ऐसा मजबूत नियामक ढांचा तैयार करना होगा जो भविष्य में ऐसी किसी भी आपदा को रोक सके और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सके।

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