
हरियाणा के एक चर्च के बाहर क्रिसमस के पावन अवसर पर हनुमान चालीसा का पाठ किए जाने से इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। यह घटना उस समय हुई जब मसीही समाज के लोग प्रार्थना सभा के लिए चर्च में एकत्रित थे। तभी स्थानीय दक्षिणपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने चर्च के ठीक सामने हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दिया और कथित तौर पर धार्मिक नारे लगाए। इस घटना ने त्यौहार के शांतिपूर्ण माहौल में खटास घोल दी और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस की भारी नफरी मौके पर पहुँची, जिसने स्थिति को बिगड़ने से पहले ही नियंत्रित किया, हालांकि इलाके में अब भी भारी सन्नाटा और तनाव बना हुआ है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वे क्षेत्र में हो रहे संदिग्ध धर्मांतरण (Conversion) के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। उनके अनुसार, त्यौहार की आड़ में भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे थे, जिसका उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से हनुमान चालीसा पढ़कर विरोध किया। दूसरी ओर, चर्च प्रबंधन और ईसाई समुदाय के नेताओं ने इन आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है। उन्होंने कहा कि क्रिसमस के दिन इस तरह का कृत्य न केवल उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि यह जानबूझकर आपसी भाईचारे को बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी है और चर्च के आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ बैठक की है ताकि शांति व्यवस्था कायम रखी जा सके। पुलिस ने सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन एहतियात के तौर पर पीएसी (PAC) की टुकड़ियों को तैनात रखा गया है। यह विवाद 2025 के अंत में धार्मिक सहिष्णुता और कानून व्यवस्था के प्रबंधन के लिए प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।



