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फिनलैंड के राष्ट्रपति का भव्य स्वागत: मोदी-स्टब वार्ता से तकनीक और व्यापार को नई उड़ान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 5 मार्च 2026 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब की गर्मजोशी से मेजबानी की। राष्ट्रपति स्टब की यह पहली भारत यात्रा दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है, जहाँ द्विपक्षीय वार्ता के केंद्र में भविष्य की तकनीक और आर्थिक साझेदारी रही। पीएम मोदी ने स्वागत भाषण में फिनलैंड को भारत का एक “भरोसेमंद और नवोन्मेषी” (Innovative) भागीदार बताया, जो सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल क्रांति के साझा विजन पर साथ चल रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों पर चर्चा करने के साथ-साथ आपसी विश्वास को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘नेक्स्ट-जेन टेक’ (6G, AI और क्वांटम कंप्यूटिंग) पर केंद्रित रहा, जिसमें फिनलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के विशाल डिजिटल बाजार के बीच तालमेल बिठाने पर सहमति बनी।

दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने और क्लीन-टेक (Clean-Tech) क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने फिनिश कंपनियों को भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियानों में निवेश के लिए आमंत्रित किया, विशेष रूप से ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में। फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय प्रतिभा और फिनिश इनोवेशन मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकाल सकते हैं।व्यापार और निवेश के अलावा, दोनों नेताओं ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया, ताकि भारतीय पेशेवरों को फिनलैंड के हाई-टेक उद्योग के अनुरूप तैयार किया जा सके। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में नॉर्डिक देशों और भारत के बीच बढ़ते रणनीतिक जुड़ाव को रेखांकित किया गया, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब ने पीएम मोदी के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार की प्रशंसा की और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका का समर्थन किया। इस यात्रा ने न केवल दिल्ली और हेलसिंकी के बीच की कूटनीतिक दूरी को कम किया है, बल्कि व्यापारिक गलियारों में भी नई ऊर्जा भर दी है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

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