स्वास्थ्य के लिए खतरा: गाजियाबाद फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर

उत्तर प्रदेश का औद्योगिक शहर गाजियाबाद एक बार फिर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल होकर चिंता का विषय बन गया है। विभिन्न रिपोर्टों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, यह शहर बार-बार ‘गंभीर’ (Severe) या ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को छू रहा है। नवंबर और दिसंबर 2025 में गाजियाबाद का मासिक औसत PM2.5 सांद्रता (Concentration) खतरनाक स्तर पर रही, जो कई बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से नौ गुना तक अधिक थी। यह स्थिति विशेष रूप से सर्दी के महीनों में देखने को मिलती है जब ठंडी हवा और कम हवा की गति प्रदूषण के कणों को सतह के पास जमा कर देती है।
गाजियाबाद में प्रदूषण के मुख्य कारणों में शहर की तेज़ गति से हो रही औद्योगिक और निर्माण गतिविधियां शामिल हैं। अनियंत्रित कंस्ट्रक्शन से उड़ने वाली धूल (Construction Dust), सड़कों पर वाहनों का भारी ट्रैफिक और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआँ प्रमुख प्रदूषक हैं। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने का धुआँ और स्थानीय स्तर पर कूड़ा जलाना भी वायु की गुणवत्ता को और भी खराब कर देता है। हवा में PM2.5 और PM10 जैसे महीन कणों की अत्यधिक मात्रा फेफड़ों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है, जिससे गाजियाबाद के नागरिकों का स्वास्थ्य खतरे में है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के विभिन्न चरणों को लागू किया है, जिसमें निर्माण कार्यों पर रोक लगाना और डीजल जनरेटर सेटों के उपयोग को प्रतिबंधित करना शामिल है। हालांकि, इन प्रतिबंधों के बावजूद वायु गुणवत्ता में सुधार केवल हवा की गति बढ़ने पर ही होता दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आपातकालीन उपायों पर निर्भर रहने के बजाय, स्थायी समाधानों जैसे कि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, उद्योगों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक और कचरा प्रबंधन में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है, ताकि गाजियाबाद के निवासियों को स्वच्छ हवा मिल सके।



