
उत्तर प्रदेश के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने इसे “खर्च कम, दिखावा ज्यादा” करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा सरकार केवल बड़े-बड़े आंकड़ों का मायाजाल बुनकर जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि बजट में घोषित की गई भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा पिछले वर्षों की तरह खर्च ही नहीं हो पाएगा, जिससे विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे। पार्टी ने इसे उत्तर प्रदेश की जनता के साथ एक ‘वित्तीय धोखाधड़ी’ बताया और कहा कि यह बजट आम आदमी की जेब भरने के बजाय कॉर्पोरेट मित्रों के हितों को साधने वाला है।
कृषि और रोजगार की अनदेखी का आरोप
बजट के तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित राशि वास्तविक जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। पार्टी का दावा है कि आवारा पशुओं की समस्या और खाद-बीज की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में कोई ठोस समाधान नहीं दिया गया है। रोजगार के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि पिछले बजटों में किए गए निवेश के वादों से कितने युवाओं को असल में नौकरी मिली? कांग्रेस के अनुसार, “नवाचार और एआई” के नाम पर बजट का एक बड़ा हिस्सा प्रचार-प्रसार और आयोजनों में खर्च किया जा रहा है, जबकि प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी ढांचों की स्थिति अभी भी दयनीय बनी हुई है।
कर्ज के बोझ और महंगाई पर घेराबंदी
कांग्रेस ने यूपी सरकार पर राज्य को कर्ज के दलदल में धकेलने का आरोप भी लगाया। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि सरकार एक तरफ विकास का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए नए ऋण ले रही है। बजट में महंगाई से राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल पर वैट (VAT) कम करने या बिजली बिलों में छूट देने का कोई प्रावधान न होने पर भी तीखी नाराजगी जताई गई। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी ‘दिखावे की राजनीति’ को छोड़कर वास्तविक धरातल पर काम नहीं किया, तो आगामी चुनावों में जनता इसका करारा जवाब देगी। पार्टी ने मांग की है कि सरकार प्रत्येक जिलेवार खर्च का श्वेत-पत्र (White Paper) जारी करे।



