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IPO बाजार: 2025 में PE निवेशकों के लिए पसंदीदा ‘एक्जिट रूट’ बना भारत

केपीएमजी (KPMG) की नवीनतम रिपोर्ट ‘पल्स ऑफ प्राइवेट इक्विटी Q3’25’ के अनुसार, 2025 में भारतीय आईपीओ बाजार निजी इक्विटी (PE) निवेशकों के लिए एक प्रमुख ‘एक्जिट रूट’ (निकासी मार्ग) के रूप में उभरा है। वैश्विक स्तर पर जहां अनिश्चितता के कारण एग्जिट वॉल्यूम में कमी आई है, वहीं भारतीय शेयर बाजारों के असाधारण प्रदर्शन ने पीई फर्मों को अपनी पोर्टफोलियो कंपनियों से बाहर निकलने और आकर्षक रिटर्न प्राप्त करने का शानदार अवसर प्रदान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अब तक भारतीय बाजारों में मांग वाले क्षेत्रों की कंपनियों ने अन्य देशों की तुलना में बहुत बेहतर ‘एग्जिट-डे मल्टीपल्स’ हासिल किए हैं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं के अनुसार, 2025 में पीई निवेश में अल्पकालिक नरमी (Softness) देखी गई है, जो मुख्य रूप से अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण है। इसके बावजूद, भारत को अभी भी पीई निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य माना जा रहा है। Q3 2025 तक भारत में पीई निवेश $14.9 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है, लेकिन आईपीओ बाजार की मजबूती ने इस पारिस्थितिकी तंत्र को नई जान दी है। विशेष रूप से उन कंपनियों में पीई फर्मों की दिलचस्पी बढ़ी है जिनकी जड़ें भारत में मजबूत हैं या जो घरेलू खपत (Domestic Consumption) पर आधारित हैं।

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की बढ़ती भागीदारी और आईपीओ के प्रति उनके उत्साह ने पीई-समर्थित संपत्तियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। केपीएमजी के अनुसार, 2025 में अब तक 80 से अधिक मेनबोर्ड आईपीओ ने बाजार में दस्तक दी है, जिसमें से 50% से अधिक फंड जुटाना ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के माध्यम से हुआ है। यह स्पष्ट संकेत है कि निवेशक आईपीओ के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफावसूली कर रहे हैं। आने वाले समय में, स्वास्थ्य सेवा, लाइफ साइंसेज और तकनीक (TMT) जैसे क्षेत्रों में आईपीओ की सक्रियता और अधिक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे पीई निवेशकों के लिए भारतीय बाजार एक लाभदायक निकास द्वार बना रहेगा।

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