
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया अंतरिम व्यापार समझौते (Indo-US Trade Deal) को लेकर केंद्र सरकार पर ‘अहंकार’ और ‘आत्मसमर्पण’ का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। बजट सत्र के दौरान सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने इस समझौते को देश के हितों के साथ “थोक में किया गया सौदा” (Wholesale Surrender) करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं और देश की डेटा सुरक्षा, खाद्य संप्रभुता और ऊर्जा हितों को दांव पर लगा दिया है। राहुल गांधी का दावा है कि यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों को अमेरिकी कॉर्पोरेट के प्रभाव में ले आएगी।
राहुल गांधी ने विशेष रूप से भारतीय डेटा (Indian Data) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार ने इसे बिना किसी ठोस सुरक्षा के अमेरिकी कंपनियों के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में डेटा सबसे बड़ी शक्ति है, लेकिन मोदी सरकार ने डेटा लोकलाइजेशन की शर्तों को हटाकर और डिजिटल टैक्स पर सीमाएं लगाकर देश के भविष्य को बेच दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रेड टैरिफ में विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 3% से बढ़ाकर 18% कर दिया है, वहीं भारत ने अमेरिकी आयातों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं, जिससे स्थानीय उद्योगों और कपड़ा क्षेत्र (Textile Sector) को भारी नुकसान होने की आशंका है।
किसानों के मुद्दे पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह समझौता “किसानों के साथ विश्वासघात” है। उन्होंने आशंका जताई कि अमेरिकी कृषि उत्पादों और जीएम (GM) फसलों के आयात से भारतीय किसानों की आजीविका तबाह हो जाएगी। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से पांच सीधे सवाल पूछते हुए स्पष्टीकरण माँगा कि क्या भारतीय मवेशियों को अब अमेरिकी चारे पर निर्भर रहना होगा? उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन वार्ता की मेज पर होता, तो वह अमेरिका से बराबरी के स्तर पर बात करता और भारतीय डेटा व किसानों के हितों की रक्षा करता। कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि वे इस “किसान-विरोधी” समझौते के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करेंगे।



