सामाजिक

लिव-इन रिलेशनशिप पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: बालिगों को सुरक्षा का अधिकार

राजस्थान हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक युगांतकारी और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और रिश्तों की बदलती सामाजिक परिभाषा को बल दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दो बालिग व्यक्ति (Adult Individuals) अपनी स्वेच्छा और सहमति से एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं, भले ही उनमें से कोई या दोनों विवाह योग्य निर्धारित उम्र (Marriageable Age) तक न पहुँचे हों।

यह फैसला समाज में पारंपरिक विवाह की सीमाओं से परे, व्यक्तिगत अधिकारों को प्राथमिकता देता है। कोर्ट ने इस संबंध को संवैधानिक रूप से मान्य मानते हुए पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे लिव-इन में रह रहे जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें किसी भी तरह के उत्पीड़न या खतरे से बचाएँ। यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीने के अधिकार और निजी स्वतंत्रता के अधिकार पर प्रकाश डालता है। यह न केवल संबंधों की बदलती परिभाषा को स्वीकार करता है, बल्कि बालिगों को कानूनी हस्तक्षेप के बिना अपने जीवन साथी को चुनने और अपनी मर्ज़ी से जीवन जीने की आज़ादी देता है।

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