
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से उस समय फटकार मिली जब उन्होंने एक याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (Election Commission – EC) को ‘तानाशाह’ करार दिया। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ को नागवार गुजरी, जिन्होंने भूषण को कानूनी दायरे और दलीलों तक ही सीमित रहने की सलाह दी।
- मामले की सुनवाई: प्रशांत भूषण एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की तरफ से बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के खिलाफ एक याचिका में पैरवी कर रहे थे।
- भूषण की टिप्पणी: बहस के दौरान, प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग के कार्य करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि “बहुत से लोग मानते हैं कि आयोग ‘तानाशाह’ की तरह काम कर रहा है।”
- सुप्रीम कोर्ट की फटकार: भूषण की इस व्यापक टिप्पणी पर CJI चंद्रचूड़ ने तुरंत हस्तक्षेप किया और उन्हें सचेत करते हुए कहा, “हमें ऐसे व्यापक बयान नहीं देने चाहिए, जो दलीलों में शामिल नहीं हैं। कृपया खुद को दलीलों तक ही सीमित रखें।”
- याचिका का आधार: याचिका में आरोप लगाया गया था कि SIR के तहत मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया में जल्दबाजी की जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है और यह चुनाव आयोग की शक्तियों का दुरुपयोग है।
- भूषण का तर्क: उन्होंने कहा कि यह ‘अभूतपूर्व’ है कि मतदाता सूची को पूरी तरह से नए सिरे से शुरू किया जा रहा है, न कि केवल सामान्य संशोधन। उन्होंने इस प्रक्रिया में कर्मचारियों पर दबाव का हवाला देते हुए ’30 BLOs द्वारा आत्महत्या’ की खबरों का भी ज़िक्र किया।
- CJI की सलाह का महत्व: CJI की यह सलाह न्यायपालिका के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को दर्शाती है, जिसमें वकीलों को भावना के बजाय कानूनी तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही बहस करने की आवश्यकता होती है, ताकि कार्यवाही की गरिमा और निष्पक्षता बनी रहे।
कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए निर्देश जारी किए हैं



