
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग द्वारा कार्यक्रम जारी किए जाने के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन सीटों के लिए 16 मार्च 2026 को मतदान होगा और उसी दिन शाम को परिणाम घोषित किए जाएंगे। ये सीटें भाजपा सांसद राम चंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त होने के कारण खाली हो रही हैं। चुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना 26 फरवरी को जारी की जाएगी, जबकि नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। इस घोषणा के तुरंत बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन और संख्या बल को सुरक्षित करने के लिए रणनीतिक बैठकें शुरू कर दी हैं।
वर्तमान विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा की इन दो सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव के गणित के हिसाब से एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 31 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है। इस लिहाज से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक-एक सीट आसानी से जीतने की स्थिति में नजर आ रहे हैं। भाजपा जहाँ अपनी सीट बरकरार रखने के लिए किसी कद्दावर ओबीसी चेहरे या केंद्रीय नेतृत्व के करीबी नेता पर दांव खेल सकती है, वहीं कांग्रेस अपनी एक सीट पक्की करने के लिए किसी वरिष्ठ नेता या एआईसीसी (AICC) के किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार कर रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की ओर से बी.के. हरिप्रसाद और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नामों की चर्चा जोरों पर है, जबकि भाजपा खेमे में राम चंद्र जांगड़ा को दोबारा मौका देने या किसी नए स्थानीय चेहरे को लाने पर मंथन चल रहा है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव केवल दो सीटों का नहीं, बल्कि राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ और एकजुटता दिखाने का एक बड़ा अवसर है। निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के विधायकों की भूमिका भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकती है, यदि कोई तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतरता है। फिलहाल, दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में आलाकमान के साथ संपर्क में है।



