
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) के सांसदों ने हाल ही में लागू की गई चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) के विरोध में संसद भवन परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इन संहिताओं को केंद्र सरकार ने बीते 21 नवंबर को लागू किया है, जिसके खिलाफ विपक्षी दल इसे ‘मजदूर विरोधी’ और ‘पूंजीपति समर्थक’ बता रहे हैं। विरोध प्रदर्शन: विपक्षी सांसदों ने संसद के ‘मकर द्वार’ के निकट एकत्र होकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं जिन पर “मजदूर विरोधी कानून वापस लो” जैसे नारे लिखे थे। शामिल प्रमुख नेता: इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेता शामिल थे। विपक्ष के मुख्य आरोप: विपक्षी दलों और ट्रेड यूनियनों की मुख्य आपत्ति निम्नलिखित चिंताओं पर केंद्रित है: छंटनी की सीमा में वृद्धि: छंटनी की सीमा को 100 से बढ़ाकर 300 श्रमिकों तक कर दिया गया है। विपक्ष का दावा है कि इससे 80% से अधिक कारखाने सरकारी मंजूरी के बिना मनमाने ढंग से श्रमिकों को नौकरी से हटा सकेंगे, जिससे नौकरी की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। निश्चित अवधि के रोजगार (Fixed-Term Employment): इसके विस्तार से स्थायी नौकरियाँ खत्म हो जाएंगी, और कंपनियाँ लंबे समय तक लाभ से बचने के लिए अल्पकालिक अनुबंध पर श्रमिकों को रख सकती हैं। काम के घंटे: कोड में कागज़ पर आठ घंटे काम की बात है, लेकिन 12 घंटे की शिफ्ट भी कराई जा सकती है, जिससे थकान और सुरक्षा जोखिम बढ़ जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा: प्रवासी श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपायों का अभाव और अनिवार्य आधार-आधारित पंजीकरण से अनौपचारिक श्रमिकों के बाहर होने का जोखिम है। विपक्ष ने मांग की है कि इन श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए।



